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देश के प्रति आपके क्या कर्तव्य होने चाहिए
Post on: 13-09-2021

दुनिया का कोई भी इंसान हो, उसकी प्रवृत्ति में यह बात जन्मजात रूप से शामिल रहा करती है कि वह जिस मिट्टी से पैदा हुआ और जहां की मिट्टी में…


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वैश्विक महामारी के कारण आने वाले समय में जब तक परिस्थितियां सामान्य नहीं हो जा रही हैं तब तक के लिए सभी कथाएं स्थगित हैं । सामान्य स्थिति होने पर कथाओं की जानकारी को अपडेट कर दिया जाएगा । जय सियाराम ।।

ABOUT PUJYA MAHARAJ SHRI

भारत की संस्कृति और इसका वाङ्गमय विश्व में सर्वश्रेष्ठ है । विश्व को सन्मार्ग पर अग्रसर करने को भारत माँ अपनी गोद में समय समय पर अद्धितीय प्रतिभा का लालन पालन करती हैं । इसी क्रम में भारत माँ ने तीनों लोकों और चौदह भुवन में सबसे पवित्र श्रीअवध की माटी में 13 अगस्त 1990 दिन सोमवार को पूजनीया माता गीता देवी जी के अंक से श्री रामचरित को जन जन के जीवन में संचारित करने के पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी के भावपूर्ण काव्यांजलि को समाज में यथार्थ रूप देने के लिए "समर्थ गुरु" पूज्य श्री अनूप जी महाराज को जन्म दिया । श्री राम काज हेतु अवतरित जीव हेतु सम्पूर्ण प्रकृति प्रारम्भ से ही अनूकूल मार्ग प्रशस्त करती जाती है । पूज्य महाराज श्री प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल में पूर्ण करते हुए पूज्य नाना जी के सानिध्य में बचपन से ही आध्यात्मिक संस्कार ग्रहण करना प्रारंभ कर दिया । 5 वर्ष की छोटी सी आयु में आपने सुंदरकांड के पाठ का गान करना सीख लिया श्री रामकथा में आपकी रुचि, श्री सीताराम भगवान जी एवं श्री हनुमान जी महाराज के प्रति आपकी अगाध श्रद्धा, विश्वास एवं लगन के प्रसाद स्वरूप आपको 13 वर्ष की आयु में पूज्य गुरुदेव के रूप में सन्यासी जी महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ । पूज्य गुरुदेव ने ही आपमें आध्यात्मिक जीवन के साथ तकनीकी शिक्षा के साथ युवाओं के रोजगार एवं जीवन सुधार के लक्ष्य का बीज स्फुटित कर दिया। पूज्य महाराज श्री ने तकनीकी शिक्षा के रूप में कंप्यूटर साइंस विभाग से इंजिनीरिंग में स्नातक (B.Tech.) और परास्नातक(M. Tech)की शिक्षा प्राप्त की और इस दौरान आपको प्रो. डॉ. पुण्यात्मा सिंह जी (प्रो. गणित IIT, Kanpur) का सानिध्य मार्गदर्शक के रूप में प्राप्त हुआ । श्री सीताराम जी भगवान की कृपा, पूज्य गुरुदेव भगवान की प्रेरणा एवं शैक्षिक जीवन के मार्गदर्शक प्रो. डॉ. पुण्यात्मा सिंह( IIT KANPUR) के मार्गदर्शन में मानसिक सहज सन्यास लेते हुए एक सुदृढ़ समाज की संकल्पना से "भारत निर्माण मिशन" की स्थापना की । जिसके माध्यम से जन जन को श्री रामकथा से जोड़कर उनके जीवन को ऊर्जावान, संस्कारवान और संकल्पित बना कर जीवन को जीने की कला का ज्ञान देकर श्री रामचरितमानस की कलयुग में प्रासंगिकता को साकार स्वरूप दे रहे हैं ।

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ABOUT Bharat Nirman Mission

पूज्य महाराज श्री अनूप जी महाराज ने भारत राष्ट्र की आध्यात्मिक परिभाषा की विवेचना की जिसके अनुसार "भारत" शब्द भ+अ+र+त से हुआ है जिसका विश्लेषण सनातन धर्म मे बताए इस श्लोक से देकर पूज्य महाराज श्री ने भारत ही विश्व में प्रसिद्धि प्राप्त करी । भरजनं भव बीजानां(भवसागर में आवागमन रूपी बीज जैसे भूंज दिया जाय तो पुनर्जन्म का चक्र समाप्त हो जाएगा), अर्जनम धन सम्पदां(धन संपदा अर्जित होगी) । तर्जनम यम दूतानां(यम के दूत डर कर भाग जाएंगे ) राम रामेति गर्जनं(शर्त सिर्फ एक ही है कि राम राम की गर्जना होती रहे अर्थात राम नाम का स्मरण चलता रहे) । इसी विश्लेषण को अपने जीवन मे धारण करने पर श्री राम प्रभु की प्रेरणा से पूज्य महाराज श्री ने "भारत निर्माण मिशन" की स्थापना की जिसके तत्वावधान में श्री रामकथा का आयोजन कर जन जन को श्री रामचरितमानस से जोड़कर उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन को न सिर्फ समृद्ध, भक्तिमय, सहज और आनंद से परिपूर्ण करते हैं बल्कि युवान साथियों को अपने लक्ष्य निर्धारण हेतु मार्गदर्शन, लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रशिक्षण एवं आवश्यक संसाधनों की निःशुल्क व्यवस्था कर जीवन को आनंदित अनुभव कर रहे हैं ।

भारत निर्माण मिशन से जुड़ें

अविस्मरणीय पल

About Shri Ram Katha

|| जय सिया राम ||

|| श्रीराम || एक आदर्श पुत्र एक आज्ञाकारी शिष्य एक आदर्श मित्र एक श्रेष्ठ पति एक श्रेष्ठ राजा एवं उत्तम पुरुष है |

जिनका जन्म अखण्ड भारत के अयोध्या नगरी में चक्रवर्ती सम्राट श्रीदशरथ जी महाराज की बडी रानी माँ कौशल्या जी के अंग से त्रेतायुग में हुआ था। भक्तों का ऐसा विश्वास है की “श्रीराम ब्रह्म के अवतार साक्षात भगवान हैं” परन्तु श्रीराम ने अपने को सहज मानव जैसा ही दर्शाया |

अपने पुज्य पिताजी द्वा‌रा माँ को दिए २ वचनो कॆ कारण श्रीराम ने १४ वर्षों का वनवास स्वीकार कीया। उनके साथ उनके छोटे भाई लक्ष्मण जी एवं धर्मपत्नि माता सीता जी ने भी वनवास ले लिया. वन में असुरों के राजा रावण ने सीता माता के छाया स्वरुप का हरण कर लिया जिसके कारण श्रीराम जी ने आवेश लेकर रावण का ससमाज संहार करके सीता माता के साथ श्री आयोध्या वापस आए जहाँ गुरुदेव वशिष्ठ जी ने श्रीराम जी का राज तिलक कीया तब राम राज्य की स्थापना हुई ।

इसी लिए त्रेता युग में जन्में श्रीराम जी की गाथा आज तक गायी जा रही है।

श्री राम कथा प्रेममूर्ति पूज्य संत श्री अनूप जी महाराज वर्तमान श्रीराम कथा गायन में एक ऐसा नाम है जिनके स्वर की लहरों में श्रोता डूब जाता है।

पूज्य महाराजश्री द्वारा श्रीरामचरित मानस में वर्णित दोहे – चौपाईयों के गायन की प्रस्तुति ऐसी अदभुत है की जब पूज्य श्री कथाप्रसंगों के भावो में डूबकर गाते हैं तो ऐसा लगता है मानों प्रत्यक्ष दृश्य दर्शन हो रहा है। आप भी अवश्य सुनिए। और देखिए ।

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श्री रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य

01.~मानस में राम शब्द = 1443 बार आया है।
02.~मानस में सीता शब्द = 147 बार आया है।
03.~मानस में जानकी शब्द = 69 बार आया है।
04.~मानस में बैदेही शब्द = 51 बार आया है।
05.~मानस में बड़भागी शब्द = 58 बार आया है।
06.~मानस में कोटि शब्द = 125 बार आया है।।

श्री रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य

07.~मानस में एक बार शब्द = 18 बार आयाा है।
08.~मानस में मन्दिर शब्द = 35 बार आया है।
09.~मानस में मरम शब्द = 40 बार आया है।
10.~लंका में राम जी = 111 दिन रहे है।
11.~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
12.~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।

श्री रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य

13.~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
14.~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
15.~मानस में 24000 छंद है जो 7 अध्याय या खंड में विभाजित है।
16.~जिस समय श्री राम वनवास को गए थे उस समय उनकी आयु 27 वर्ष थी।
17.~लंका पहुँचने के लिए समुन्द्र पर रामसेतु का निर्माण करने में सिर्फ 5 दिन लगे थे|

श्री रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य

18.~मानस के अनुसार कि राम-रावण का युद्ध 32 दिन चला था जबकि दोनों सेनाओं के बीच 87 दिन तक युद्ध हुआ।
19.~भगवान् विष्णु के 1000 नामों में राम नाम 394 नम्बर पर दर्ज है।
20.~रामजी के धनुष का नाम कोदंड था।
21.~रामायण के हर हजार छंद का पहला अक्षर लें तो जो 24 अक्षर हमे मिलते हैं वो मिलकर गायत्री मन्त्र बनते हैं।
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